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ବଢ଼ୁଥିବା ଜନସଂଖ୍ୟା ପାଇଁ ଗର୍ଭ ନିରୋଧକର ନୂଆ ଉପାୟକୁ କାହିଁକି ଗ୍ରହଣ କଲେନି ଗାନ୍ଧୀଜୀ, ଫେଲ ମାରିଥିଲେ ବିଶେଷଜ୍ଞ ମାର୍ଗରେଟ

pic- internet

  • ଦମ୍ପତ୍ତିଙ୍କୁ ବ୍ରହ୍ମଚର୍ଯ୍ୟ ପାଳନ କରିବା ପାଇଁ ଗାନ୍ଧୀଜୀ ଦେଇଥିଲେ ନିଷ୍ପତ୍ତି
  • ପୂରା ଜୀବନରେ ତିନିରୁ ଚାରି ଥର ସମ୍ଭୋଗ କରିବା ଆବଶ୍ୟକ
  • ଜନ ସଂଖ୍ୟା ନିୟନ୍ତ୍ରଣ ପାଇଁ ଗର୍ଭ ନିରୋଧକର ଉପାୟ ଆପଣାଇବାକୁ କହୁଥିଲେ ବିଶେଷଜ୍ଞ

ନୂଆଦିଲ୍ଲୀ: ବନ୍ଧ୍ୟାକରଣ ଓ ଗର୍ଭ ନିରୋଧକର ନୂଆ ତରିକା ଆପଣାଇବା ବିରୋଧରେ ଥିଲେ ମହାତ୍ମା ଗାନ୍ଧୀ। ଭାରତରେ ବଢ଼ୁଥିବା ଜନସଂଖ୍ୟା ୩୦ ଦଶକରୁ ଚିନ୍ତା ବଢ଼ାଇଥିଲା। ଏହାକୁ ରୋକିବା ପାଇଁ ଆମେରିକା ବର୍ଥ କଣ୍ଟ୍ରୋଲ ଏକ୍ସପର୍ଟ ମାର୍ଗରେଟ ସେଙ୍ଗର ଭାରତ ଆସିଥିଲେ। ସେ ଗାନ୍ଧୀଜୀଙ୍କୁ ଭେଟି ଏନେଇ ଆଲୋଚନା କରିଥିଲେ। ହେଲେ ନିରାଶ ହୋଇ ଫେରିଥିଲେ।

 13 जनवरी 1936 को वर्धा रेलवे स्टेशन पर एक अंग्रेज महिला उतरीं. वो खासतौर पर एक उद्देश्य से गांधी से मिलने आईं थीं. वो गर्भ निरोध की विशेषज्ञ थीं. उनका नाम था मार्गरेट सैगर. वर्धा स्टेशन से आश्रम तक वो बैलगाड़ी पर बैठकर पहुंचीं. गांधी जमीन पर शॉल लपेटकर बैठे हुए थे और उनका इंतजार कर रहे थे. वो गांधीजी के लिए कई उपहार और किताबें लेकर आई थीं. (file photo)

୧୩ ଜାନୁଆରୀ ୧୯୩୬ରେ ବର୍ଦ୍ଧ ରେଲୱେ ଷ୍ଟେସନରେ ଜଣେ ଇଂରେଜ ମହିଳା ଓହ୍ଲାଇଥିଲେ। ସେ ଏକ ଉଦ୍ଦେଶ୍ୟ ନେଇ ଗାନ୍ଧୀଜୀଙ୍କୁ ଭେଟିବାକୁ ଚାହୁଁଥିଲେ। ସେ ଜଣେ ଗର୍ଭ ନିରୋଧକର ବିଶେଷଜ୍ଞ ରହିଥିଲେ। ତାଙ୍କ ନାଁ ଥିଲା ମାର୍ଗରେଟ ସେଗର। ବର୍ଦ୍ଧା ଷ୍ଟେସନରେ ଓହ୍ଳାଇବା ପରେ ଆଶ୍ରମରେ ପହଞ୍ଚିଥିଲେ। ସେଠାରେ ସେ ଦେଖିଥିଲେ ଯେ ଗାନ୍ଧୀଜୀ ତଳେ ଏକ ଶାଲ ବିଛାଇ  ବସିଥିଲେ ଏବଂ ତାଙ୍କୁ ଅପେକ୍ଷା କରିଥିଲେ। ସେ ଗାନ୍ଧୀଜୀଙ୍କ ପାଇଁ କିଛି ଉପହାର ଓ ପୁସ୍ତକ ନେଇ ଆସିଥିଲେ। 

 मिस सैगर ने न्यूयॉर्क में 1917 में गर्भ निरोधक क्लिनिक खोली हुई थी. कहा जा सकता है कि अमेरिका में उन्होंने महिलाओं को गर्भ निरोध के प्रति जागरूक करने के लिए आंदोलन शुरू किया था. हालांकि उनके इस कदम से प्यूरिटन और कैथोलिक दोनों ही उनके खिलाफ हो गए थे. मिस सैगर कहती थीं, "एक महिला के शरीर पर केवल उसी का अधिकार है." मार्गरेट सैगर को बंदी बनाया गया. बदनाम किया गया. पुलिस ने डराया धमकाया. लेकिन वह अपना काम करती रहीं. (file photo)

    

ମିସ୍ ସେଗର ନ୍ୟୁର୍କରେ ୧୯୧୭ରେ ଗର୍ଭ ନିରୋଧକ କ୍ଲିନିକ ଖୋଲିଥିଲେ। ସେ ଆମେରିକାରେ ମହିଳାଙ୍କୁ ଗର୍ଭ ନିରୋଧକ ପ୍ରତି ଶଚେତନ କରାଇବା ପାଇଁ ଆନ୍ଦୋଳନ ଆରମ୍ଭ କରିଥିଲେ। ହେଲେ ତାଙ୍କର ଏହି ପଦକ୍ଷେପକୁ ଉଭୟ ପ୍ୟୁରିଟନ ଏବଂ କ୍ୟାଥୋଲିକ୍ ତାଙ୍କ ବିରୁଦ୍ଧରେ ଯାଇଥିଲେ। ମିସ୍ ସେଗର କହୁଥିଲେ ଯେ ଜଣେ ମହିଳାଙ୍କ ଶରୀର କେବଳ ତାଙ୍କର ଅଧିକାର। ଏନେଇ ମାର୍ଗରେଟ  ସେଗରଙ୍କୁ ବନ୍ଦୀ କରାଯାଇଥିଲା। ପୁଲିସ ତାଙ୍କୁ ଡରାଇବା ସହ ଧମକାଇଥିଲେ ମଧ୍ୟ ସେ ନିଜ କାମ ଜାରି ରଖିଥିଲେ।

 मिस सैगर खूबसूरत आयरिश महिला थीं. वो चाहती थीं कि भारत में भी गर्भ निरोध के तरीकों को इस्तेमाल में लाया जाए. उन्हें अंदाज था कि उनके इस अभियान में गांधी उनकी कोई खास मदद नहीं करने वाले. जब मार्गरेट आश्रम पहुंचीं उस दिन गांधी ने उनका स्वागत जरूर किया लेकिन वो उनके मौन, ध्यान और प्रार्थना का दिन था. कोई बात नहीं हो पाई. मार्गरेट को अतिथि कक्ष में पहुंचा दिया गया. वो छोटा सा चार कमरों का घर था. जहां बगैर गद्दों की चारपाइयां थीं और पत्थर की मेज कुर्सियां. (file photo)

ମିସ ସେଗର ଚାହୁଁଥିଲେ ଯେ ଭାରତରେ ଗର୍ଭ ନିରୋଧକ ତରିକାକୁ ବ୍ୟବହାର କରାଯାଉ। ତାଙ୍କୁ ଜଣାଥିଲା ଯେ ଏହି ଅଭିଯାନକୁ ଗାନ୍ଧୀଜୀ ସମର୍ଥନ କରିବେ ନାହିଁ। ଯେତେବେଳେ ମାର୍ଗରେଟ  ଆଶ୍ରମରେ ପହଞ୍ଚିଥିଲେ, ଗାନ୍ଧୀଜୀ ତାଙ୍କୁ ସ୍ୱାଗତ କରିଥିଲେ। ହେଲେ ସେହି ଦିନ ଗାନ୍ଧୀଜୀଙ୍କର ମୌନ, ଧ୍ୟାନ ଓ ପ୍ରାର୍ଥନାର ଦିନ ଥିଲା। କୌଣସି ଆଲୋଚନା ହୋଇପାରିନଥିଲା ମାର୍ଗରେଟଙ୍କୁ ଅତିଥି କକ୍ଷକୁ ପହଞ୍ଚାଇ ଦିଆଯାଇଥିଲା।

 रॉबर्ट पेन की किताब "लाइफ एंड डेथ ऑफ महात्मा गांधी " के अनुसार आश्रम का वातावरण सैगर को बहुत आकर्षित नहीं कर सका. वहां सिंचाई के लिए कोल्हू और लकड़ी के चक्के का प्रयोग किया जा रहा था. उन्हें हैरानी हो रही थी कि गांधी क्यों जानबूझकर मशीनों से मुंह मोड़े हुए हैं. लेकिन उन्होंने ये भी महसूस किया कि गांधी के इर्द गिर्द एक दीप्तिमय वातावरण होता है. चूंकि गांधी एक अच्छे स्वाभाव के आतिथेय थे लिहाजा मार्गरेट को उम्मीद बंधने लगी कि वह उनकी बातों को समझेंगे. (wiki commons)

ରବର୍ଟ ପେନଙ୍କ ପୁସ୍ତକ ‘ଲାଇଫ ଡେଥ ଅଫ ମହତ୍ମା ଗାନ୍ଧୀ’ ଅନୁସାରେ ଆଶ୍ରମର ପରିବେଷ ସେଗରଙ୍କୁ ଖୁବ୍ ଭଲ ଲାଗିଥିଲା। ସେଠାରେ ଜଳସେଚନ ପାଇଁ କାଠର ଚକ ବ୍ୟବହାର କରାଯାଉଥିଲା। ହେଲେ ତାଙ୍କୁ ଆଶ୍ଚର୍ଯ୍ୟ ଲାଗିଥିଲା ଯେ ଗାନ୍ଧୀଜୀ କାହିଁକି ମେସିନ ପସନ୍ଦ କରୁନଥିଲେ। ସେଠାରେ ସେ ଏହା ମଧ୍ୟ ଅନୁଭବ କରିଥିଲେ ଯେ ଗାନ୍ଧୀଜୀଙ୍କ ଚାରିପାଖେ ଏକ ଉତ୍ତମ ବାତାବରଣ ରହିଥିଲା।  

 अगले दिन जब मार्गरेट की मुलाकात गांधी से हुई तो वह अपने तर्कों के साथ उन्हें मनाने में जुट गईं. लेकिन जैसे ही वो एक तर्क प्रस्तुत करतीं गांधी उसे काट देते. उनका केवल एक सिद्धांत था, जिसके आगे मार्गरेट के सारे तर्क फेल हो रहे थे. गांधी की दृष्टि में "जनन के उदेश्य के अतिरिक्त संभोग पाप है, किसी दंपत्ति के वैवाहिक जीवन में केवल तीन या चार बार संभोग होना चाहिए, क्योंकि परिवार के लिए तीन या चार बच्चों की जरूरत होती है. गर्भ निरोध का एकमात्र प्रभावी उपाय ये है कि दंपति पूरी तरह से ब्रह्मचर्य का पालन करें, जब वास्तव में बच्चे की जरूरत हो तभी संभोग करें." इसके बारे में मार्गरेट सेंगर ने फिर से विस्तार से लिखा भी. (maragret sanger blog)

ଗୋଟିଏ ଦିନ ପରେ ଯେତେବେଳେ ମାର୍ଗରେଟ ଗାନ୍ଧୀଜୀଙ୍କୁ ଭେଟିଥିଲେ ସେ ତାଙ୍କର ତର୍କର ସହ ବୁଝାଇବାକୁ ଚେଷ୍ଟା କରିଥିଲେ। ହେଲେ ଗାନ୍ଧୀଜୀଙ୍କ ନିକଟରେ କେବଳ ଗୋଟିଏ ସିନ୍ଧାନ୍ତ ଥିଲା ଯାହା ଆଗରେ ମାର୍ଗରେଟଙ୍କ ସବୁ ତର୍କ ଫେଲ ମାରିଥିଲା। ଗାନ୍ଧୀଜୀଙ୍କ ଦୃଷ୍ଟିରେ ସନ୍ତାନ ଉଦ୍ଦେଶ୍ୟରେ ଅତିରିକ୍ତ ସମ୍ଭୋଗ ପାପ। କୌଣସି ଦମ୍ପତ୍ତି ବୈବାହିକ ଜୀବନରେ ତିନିରୁ ଚାରି ଥର ସମ୍ଭୋଗ କରିବା ଭଲ। କାରଣ ପରିବାର ପାଇଁ ତିନିରୁ ଚାରି ସନ୍ତାନ ହେବା ଆବଶ୍ୟକ। ଗର୍ଭ ନିରୋଧକର ଏକମାତ୍ର ଉପାୟ ହେଉଛି ଦମ୍ପତ୍ତିଙ୍କୁ ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ ଭାବେ ବ୍ରହ୍ମଚର୍ଯ୍ୟ ପାଳନ କରିବା। ଯଦି ବାସ୍ତବରେ ପିଲାର ଆବଶ୍ୟକ ହୁଏ ତେବେ ସମ୍ଭୋଗ କରନ୍ତୁ।

 गांधी अपने तर्क बिल्कुल शांत और धीमी आवाज के साथ सधे हुए शब्दों में रख रहे थे. मिस सैगर थोड़ी विचलित थीं. उन्हें लग रहा था कि गांधी उनकी बातों और भावों को अपने अंदर जाने ही नहीं दे रहे थे.संतति निरोध पर गांधी के विचारों का निर्धारण उनके अपने जीवन के अनुभवों के आधार पर ही हुआ था. मिस सैगर ने शुद्ध प्राकृतिक उपाय भी सुझाए. वर्धा में नींबू के पेड़ भी थे और वहां कपास भी उगता था. दोनों पूरी तरह से प्राकृतिक थे. नींबू के रस में रूई का डूबा फोहा एक आसान गर्भ निरोधक था. गांधीजी को इस तरीके पर भी सख्त एतराज था. उनके अनुसार रुई का फाहा भी प्राकृतिक प्रक्रिया में एक अप्राकृतिक बाधक था. (maragret blog)

      

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